इन जगहों से है भगवान शिव का अनोखा नाता

बहुत से शिव भक्तों को पता होगा कि वाराणासी भगवान शिव की मनपसंद नगरियों में से एक है। उत्तर प्रदेश में स्थित यह नगरी अपने घाटों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।पौराणिक मान्यता के अनुसार यह नगरी शिव के त्रिशूल पर विद्यमान है। भगवान शंकर का प्राचीन व सबसे मनपंसद ज्योतिर्लिंग “श्री कशीविश्वनाथ” यहीं पर स्थापित है। कहा जाता है कि जिस भी इंसान को अपने जीवन में सफलका हासिल करनी हो तो उसे जीवन में एक बार भगवान शंकर की इस खूबसूरत नगरी के दर्शन ज़रूर करने चाहिए। इसके अलावा जो लोग काशी में निवास करते हैं, यहां रहकर उनकी उपासना करते हैं उन्हें शिव जी से सीधा मुक्ति का वरदान मिलता है। 
उज्जैन-
उज्जैन को भारत की प्राचीन सात नगरियों में से एक प्रमुख नगरी माना जाता है। शिव जी का शक्तिशाली ज्योतिर्लिंग “महाकालेश्वर” यहीं स्थापित है। इस ज्योतिर्लिंग की सबसे खास बात यह है कि यह दक्षिणमुखी शिवलिंग है। इसके अलावा यहां होने वाली  भस्म आरती भी यहां की खासियत है। मान्यता है कि उज्जैन जाकर शिव जी का दर्शन करने से आयु रक्षा होती है और स्वास्थ्य उत्तम होता है। साथ ही सभी तरह के मंगल दोषों का नाश होता है।

सौराष्ट्र-
पौराणिक मतानुसार भगवान शिव का पहला और अति प्राचीन शिवलिंग “सोमनाथ” यहीं यानि सौराष्ट्र में ही स्थापित है। कहा जाता है कि सौराष्ट्र में ही क्षेत्र है, जहां श्रीकृष्ण ने शरीर त्याग किया था। कहते हैं कि सोमनाथ के ज्योतिर्लिंग की स्थापना चन्द्र देव द्वारा की गई थी। यहीं पर शिव जी की कृपा से उन्हें गणेश जी के शाप और पीड़ा से मुक्ति मिली थी। इसलिए एेसा माना जाता है कि अगर किसी के जीवन में चन्द्रमा से जुड़ी कोई समस्या हो या किसी प्रकार का कोई श्राप या दोष है, तो सौराष्ट्र में सोमनाथ का विधि-वत पूजन अर्चन करने से इन सभी से मुक्ति पाई जा सकती है।

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